एक दूसरे का मिला सहयोग- मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 55

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जब से लाक डाउन हुआ पुरा परिवार साथ मे खाना बैठना
एक दूसरे के काम मे सहयोग करना पता ही नही चलता था ।
एक अच्छी बात यह थी कि मेरी बहु कि नौकरी गांव मे है
टाइम ही नहीं मिलता था साथ मे रहने का ।उसके साथ रह कर अच्छा समय निकला
मा बेटी वाला रिश्ता हो गया।
ऐसे समय मे मेरे ससुर जी कि रात को तबीयत खराब हो गई बाहर ले जाने कि हालात मे नही थे ।रात को 3बजे डा.को लेने गये फट हा भर दी ओर घर आने के लिए तैयार हो गया समय ऐसा भयानक था
पर वे भगवान के रुप मे आऐ
ओर उन्होंने दवाई दी ओर कुछ राहत मिली
आज 25 साल हो गये कुछ नहीं लिखा थोड़ी कोशिश कि है लिखने कि । BA MA करें 30 साल हो गये ।

लेखिका – संतोषी व्यास