इस समय ने सिखाया – मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 47

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कोरोना मेरा अनुभव….
साल 2020 की शुरुआत तो अच्छी हुई, मेरी बड़ी बेटी सरकारी नौकरी में आ गई, होली के बाद से लग रहा था कोई जानलेवा बीमारी आ गई है…. इस बीमारी के वजह से मार्च के आखिरी हफ्ते मे सम्पूर्ण भारत मे 21 दिन का लाकडाउन हो गया, तब समाचार सुन-सुन के समझ में नहीं आ रहा था, कि अब आगे क्या होगा…?
मैं घर पर अकेले रहती हूं, बेटियां अपने ससुराल में हैं… बेटा और बहू बंगलौर में, चिंता होना स्वाभाविक है…. मैं बच्चों को समझाती बच्चे मुझे…. तब लगा फोन कितना जरूरी है। पहले पहले बहुत बेचैनी हुई, फिर धीरे-धीरे कुछ नया करने का मन हुआ …
भारती जी ने केक बनाना सिखाया… मेरे यहां पर नेटवर्क की बहुत दिक्कत रहती है… मैं उसे देख नही पाई थी.. दीपा ने मूझे पूरा समझाया था । मैंने बनाया ओर आ सखि ग्रुप में डाला भी। सिलाई मैं करती थी…मास्क बनाये अभी भी मास्क तो सिलती रहती हूं, इस lockdown में अपनी सेहत पर ध्यान दिया… योगा करने लगे.. मेरी छोटी बहन ओर मेरे मामा जी की बेटी, हम तीन बहने आस-पास ही रहते हैैं… उन के बच्चे ओर हम मिल कर सुबह डेढ़ घंटे योगा कर ही लेते है… इस टाइम पर मैंने बहुत सी डिस बनानी सिखी, समाचार में लोगों को भूख से बिलखते हुए देख कर बहुत दुख हुआ, अपने आस-पास जो कल सकते थे किया, ईश्वर से विनती है ये महामारी जल्द खत्म हो, हमें एक नया भारत एक नया व्यतित्व देखने को मिले।

लेखिका- बिमला गुरुरानी