मायूसी बढ़ गई- मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 43

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हम अपने अनुभव शेयर करें इससे पहले हमें यह जान लेना जरूरी है कि कोरोना है क्या? Kovid 19 नाम का यह वायरस व्यक्ति के वाल की तुलना में कई गुना ज्यादा छोटा होता है इसे महामारी घोषित किया गया यह वायरस चीन के बुहान से फैला और इसका आज तक कि डेट में कोई टीका नही बन पाया है यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है । इन दिनों अंडे और मांसाहारी भोजन  न खायें जानवरों के नजदीक भी नही जाना चाहिए अपने मास्क पर हाथ न लगाएं बल्कि फीता पकड़ कर मास्क उतारें । पिछले चार महीनों से हमारी सोच और साथ ही हमारी दुनिया बदल गई हम अपने घर से किसी काम के लिए ही बाहर जा पा रहे हैं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं सिर्फ इसलिए कि वायरस के संक्रमण को रोका जा सके । हज़ारों करोड़ों खर्च करने पर भी जो काम नहीं हो पाते वो लोकडाउन ने कर दिखाया मतलब प्रकृति का मंजर साफ हो गया ।। ये प्रतियोगिता देखकर मेरा भी मन इसमें कुछ लिखने को किया देश दुनिया को देखकर मैं तो कहूंगी बुरा बहुत बुरा हो रहा है इंसान इंसान से डरने लगा चेहरे की मुस्कान ढक गई विवाह समारोह की रौनक चली गई इंसान मायूस हो गया। न जाने कब आएंगे बो दिन जब घूमेंगे आजादी से । इन सबमे अच्छी बात यह है कि शहरों का कार्बन उत्सर्जन रुक गया । अर्थव्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी पता नहीं पर इस मुश्किल घड़ी में सब एक साथ खड़े होकर एक दूसरे का साथ देने को तैयार है जज्वे ऒर इच्छाशक्ति से हम पर्यावरण को भी बचा सकते हैं इस समय का अंधकार हम स्वच्छ वातावरण और हरी भरी हरियाली से मिटा देंगे। अंत  में बस इतना ही— लौटेंगी फिर रौनक महफिलें गुलजार होंगी ; फिर वही चमन होगा फिर वही बहार होगी ; चंद दिनों की हैं ये बंदिशें मगर आज जरूरी हैं ; खुशियों स्वीकार लो इन्हें न कहें मजबूरी है ; वायरस के दुश्मन से यह जंग वेशक भारी है मगर यह भी सच है कि सियाह रातें सदा सूरज से हारी हैं ।। जय श्री कृष्णा सखियों ।मैंने आप सबके अनुभव पढ़े सब बहुत अच्छे सीख देने बाले हैं All the best यहाँ मैंने सिर्फ अपने मन की बात लिखी है सखियों ।

लेखिका- मीरा अग्रवाल