मदद के सामाजिक कार्य – मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 40

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मेरा कोरोना काल का अनुभव  अच्छा रहा, मेरे लिए तो जैसे कोरोना कोई well व्हिशर हो जैसे.
मै जानती हु बहुतो के लिए ये  दिन बहुत ज्यादा  बहुत कष्टदायक  होता था, कोई काम नहीं, खाना नहीं बहुत सी तकलीफे. मैंने भी अपने हाथों से बहुत मदद की है क्योंकि मै एक सोशल वर्कर भी हु. पर हमें अपने अनुभव बताने है.।
शुरू शुरू मेँ तो कुछ समझ ही नहीं आया ये क्या हुआ, क्यों, कैसे. आगे क्या होगा यही चिंता.कर्फ्यू हो गया सभी जरुरत की चीजे लाई गईं. पर धीरे धीरे सब मैनेज हो गया. पतिदेव के साथ टाइम मैंने अपनी 13साल की शादी मेँ आज तक नहीं बिताया. और सच पता नहीं जैसे श्री राम मेरे घर मेँ वास  कर गए हो इतना शांति नुमा घर का माहौल कभी नहीं था किसी बात पर कोई बहस नहीं. रामायण, महाभारत, मुंशी प्रेम चन्दर की कहानिया देखते. हर एक सीरियल का बेसब्री से इंतजार रहता. बच्चे बीच बीच मेँ पूछते उनका जवाब देना बहुत  अच्छा लगता।  सीरियल देखने का एक बेनिफिट मुझे देखने को मिला. अब ऑनलाइन क्लासेज मेँ मेरे बेटे के महाभारत का चैप्टर आया. मेरे बेटे ने पहले से ही सभी क्वेश्चन के आंसर दे दिए मेम ने उसको star भी दिया और मुझे फोन पर भी बेटे की तारीफ करी. कुल मिला कर नुकशान कुछ नही हुआ कुछ   बढ़िया ही था पतिदेव को रसोई का काम नही आता तो मेरी हेल्प भी नही की पर मै अकेली सब कर लेती थी. अच्छा भी लगता था. जैसे जैसे टाइम बिता हमारी ड्यूटी शुरू हो गईं मुझे जाना होता बच्चो को राशन, मास्क, स्नाटाइज़र, बाटने.मेरे साथ एक किसा हुआ हमारे शहर में कर्फ्यू था ,  और स्कूल से फोनआ गया mam स्कूल आओ, . मै निकली पर पुलिस ने मुझे रोक लिया मेरे बताने पर की मै एक सोसल वर्कर हु तो उन्होने मेरे लिए तालिया बजाई मुझे बहुत अच्छा  लगा.हर किए गए कार्य की फोटो है मेरे पास. बस न्यूज़ देख कर बहुत दुःख होता था की ये नही होना चाहिए जो हो रहा है. श्री राम की कृपा से मेरा पूरा परिवार, मेरा मायका की तरफ से सब कुशल रहे. सावधानी ही बचाओ है और वो हमने की.
मै ऐसी जगह जाती थी अपने काम के चलते झुगी झोपडी मेँ मेरे पतिदेव मेरी बहुत चिंता करते थे. पर कहते है ना आछे काम का फल अच्छा होता है.
मुझे मेरे काम का फल मिला कुल मिला कर कोरोना का टाइम मेरे लिए बहुत अच्छा निकला।

लेखिका- अंजू शर्मा