पिंजरे में बन्द तकलीफें – मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 25

sakhi talk आ सखी चुगली करें

कोरोना #अनुभव

21 मार्च से लाॅक डाऊन हुआ था तो एकबार तो घबरा गये क्यो कि मालूम नहीं कब तक रहेगा । फिर अचानक मेरे पति देव की तबियत खराब हो गई । गुडगाँव में आये 1साल ही हूआ हमारे लिए नया में कभी भी घर से बाहर ही नहीं निकल हूई। अब क्या करू दिमाग ही काम नहीं कर रहा । पति देव मुझे समझा रहे मेरे Account number , office number अब तुम को होशियार रहना बच्चों का ध्यान रखना ।वगैरह ये ऐसा क्यो बोल रहे हैं समझ नहीं। मैंने हिमत रखी। और खुद ही हेल्प लाईन पर फोन कर रहे पर कोई नही जबाब दे रहे। फिर मैंने ही बोल आप के Dr. se contact करो तो। वहां पर भी on line fees लेकर आप को Appointment शाम का। लेकिन फोन ही नहीं उठाना। रात को 10बजे फिर तबियत खराब हो गई। फिर सोसाइटी में हमारे फ्लोर पर भैया को (पङोसी) जो लेकर गये। तो डॉ ने आप ऐनजाईटिग है।मेरे पति डाईबिटिक भी है तो उनहोंने आरोग्य सेतू में भी डाल दिया तो डॉ ने टेस्ट करने बोला तो private Hospital गये तो टेस्ट किट खत्म हो गयी थी। फिर आरोग्य सेतू वाले डॉ का फोन आता है की आप को डाईबिटिक है तो बाहर खतरा है। हम ही आते हैं टेस्ट करवाने जैसे ही टेस्ट कर के गये। तो सोसाइटी के लोगों के फोन आने लगे कि जैसे टेस्ट करवने से ही कोरोना हो ही गया आप घर से बाहर ही नहीं निकलना वगैरह वगैरह। लोगों ने अपने बारे मे सोच लिया। ये नहीं सोचा कि इन के परिवार वालों पर कया गुजर रहे होगी इन के छोटे बच्चे। लेकिन हमें मालूम था कि हमें कोरोना नहीं है। 10दिन तक घर से बाहर ही नहीं निकले जब तक report नहीं आये। फिर negative aaya..तब किसी ने फोन नहीं आया😆 बस कुछ अच्छा चल रहा ऑनलाइन सामान मंगवाना। रामायण धारावाहिक का सपरिवार देखना, नये नये व्यंजन बनाना , समर क्लास में कूछ सिखना। बस उन लोगों की चिंता जो अपने परिवार से दूर है, काम धन्धे सारे बंद हो गया। फिर अचानक समर क्लास में किसी ने सुशांत राजपूत वाली पोस्ट तब से मन विचलित ( depression) समर क्लास भी अच्छे से नहीं कर। फिर मेरे पति देव को समस्या बताई तो उन्होंने मुझे दवाईयों देते। फिर भी मैंने समर क्लास में कूछ न कुछ बनाया। ऐसे धीरे-धीरे सब अच्छा लगने लगा था। और अच्छा चल रहा है कि हम सभी मूवी देख रहे थे। कि अचानक 12 जुलाई की रात पति की तबियत खराब हो गई Heart rate जयादा हो गई हॉस्पिटल में3दिन एडमिट रखा । सारे टेस्ट करवा लिया सब नार्मल फिर भी Heart rate कम ही नहीं हो रही।एनजीओ भी कर लिया है dr ने रिस्क है पर Heart rate नीचे आ जाये गी। मेरे लिए डिसीजन ले ना बहुत मुश्किल लेकिन मेरे पति देव ने डिसीजन ले लिया और भगवान के आशीर्वाद से सब अच्छा हो गया है । मदद के लिए भगवान के रूप में भइया (पङोसी) उन्हे बहुत बहुत धन्यवाद। सच में कोरोना ने भयंकर परेशान कर डाला ।
लेकिन लाॅकडाऊन में यह अहसास हूआ की पिंजरे में बंद पक्षियों का दर्द महसूस किया । कि वे बेचारे बेजुबान अपने दर्द को बता ही नहीं सकते। पक्षियों को पिंजरे में बंद नहीं रख ना चाहिए।

लेखिका- अभिलाषा ओझा