सीखने सीखने में बीता- मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 49

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# कोरोना# अनुभव
मैं सोनू आशीष थानवी फलोदी जोधपुर से कोरोना नामक बीमारी के बारे में मैंने सबसे पहले सुना कि चीन में यह बीमारी फैली हुई है तो इतना टेंशन नहीं हुआ फिर धीरे-धीरे यह सब सभी जगह पर फैलने लगा तो थोड़ा डर सा लगने लगा ऐसे चलते चलते यह जोधपुर में भी आ गया और हालत इतनी खराब हो गई कि लॉकडाउन करना पड़ा पहले तो 21 दिन का लॉक डाउन हुआ सोचा कोई बात नहीं यह दिन यूं ही निकल जाएंगे परिवार के साथ फिर यह तो धीरे-धीरे लॉकडाउन बढ़ने लगा तो साथ में टेंशन भी बढ़ने लगी एक तो पैसा नहीं आया दूसरा खर्चा ऑफिस का किराया स्कूटी की किस्त पानी बिजली का किराया दूध अखबार सब का किराया सारे काम तो रुक नहीं सकते लेकिन फिर भी हो सका उतना कम का तो कम ज्यादा हुआ तो ज्यादा ऐसे करके घर चलाया इतने में ही बैठे-बैठे पूरे 2 रूम की छुट्टी कर दी हमने मन को बहलाने के लिए घर के गेट भी कलर कर दिए जो कब का लाया हुआ था लेकिन टाइम ना मिलने के कारण हुआ नहीं तो लॉकडाउन का हमने अच्छे से फायदा भी उठाया उसके बाद हमारे ग्रुप की एडमिन साहिबा प्रवीणा दी उनकी वजह से रोज कुछ ना कुछ मैं सीखी और अपने आप को इस काबिल बनाया हर दिन कुछ नया कुछ नई डिश बनाने की कोशिश की कभी क्या बनाया तो कभी क्या और इतना परफेक्ट बना कि मैं आपको कह नहीं सकती और मधु भारती के द्वारा बताया हुआ केक तो मैंने इतनी बार बनाया ना कि हर कोई ही बोलता है कि मुझे वह वाला केक सिखा दो तो थैंक यू प्रवीण आदि और भारती दी उसके अलावा में थैंक्यू कहना चाहूंगी चंद्रकला दी को जिन्होंने मुझसे भजन के लिए कहा कि आप हफ्ते में एक दिन भजन गा सकोगे तो मैंने बड़ी खुशी खुशी हां बोल दिया क्योंकि मुझे भजन का बहुत शौक है तो हर सोमवार को मेरा भजन होता है और मैं लाइव आती हूं और बहुत ही सखियों का प्यार मिलता है मुझे तो चंद्रकला जी को भी बहुत-बहुत धन्यवाद उसके चलते ही खत्म हुआ तो मैं अपने फलोदी पीहर और ससुराल दोनों जगह उस दिन सासु मां के साथ घर की साफ सफाई खाना पीना उसके बाद अपने मम्मी पापा की भैया भाभी जी वह पल बहुत खुश थे इस बार तो ऐसा ही लग रहा था छुट्टियां ऐसे ही चली जाएगी अपनों से मिल नहीं पाएंगे बहुत अच्छा लगा सब से मिलना हुआ और हमारे मोहल्ले में एक लेडी है जिनकी स्थिति बहुत ही गंभीर है ऐसे में ही रहती है तो लॉकडाउन के चक्कर में तो बहुत ज्यादा खराब हो गई थी तो हमने जितना हो सके उतनी उनकी मदद की और जैसे ही हमको पता चला कि वहां से गरीब लोगों को कुछ ना कुछ राशन पानी मिल रहा है तो हम उनसे कांटेक्ट करके वहां तक उनके घर तक पहुंचाते तो यह भी एक थोड़ी सी सेवा करके अच्छा लगा कुछ भी कहो कोरोना नामक बीमारी ने बहुत कुछ सिखा दिया लेकिन सखियों का प्यार और साथ मिला तो हमने इस बीमारी को भी पार कर लेंगे अभी भी जोधपुर में हालात बहुत खराब है लेकिन अब काम तो करना पड़ेगा ऐसे रुक नहीं सकते बस भगवान से यही दुआ है बस कोई परिवार भूखा ना सोए भगवान सबकी रक्षा करें और सब को स्वस्थ रखें और यह कोरोना नामक बीमारी को जल्दी ही दूर करें खत्म करें धन्यवाद सखियां

लेखिका- सोनू आशीष