मेरा कोरोना वर्ष अनुभव -9

sakhi talk आ सखी चुगली करें

2020 में प्रवेश कर नई आशा व उमंग के साथ कुछ लक्ष्य निर्धारित किये
फरवरी में कुछ कार्य सिद्ध भी हुए 😇
होली से पहले एक सुगबुगाहट सुनी चीन में
‘कोरोना वायरस’ का आक्रमण हुआ है, जो दिन-प्रतिदिन रौद्र रूप दिखा रहा है ।
भारत के केरल में आगमन हुआ ,
उसके बाद मार्च के अंत तक तो चिंता का विषय बन गया
सावधानीवश मार्च में देश में ताला-बन्दी घोषित हुई
तो घर में पतिदेव और बेटे के कार्यालय खुलने लगे।
एक आश्चर्य जनक शांति थी ,जो कभी मन को विश्वास देती तो कभी निराशा भर रही थी
सकारात्मकता बनाये रखना कई बार कठिन होता पर मेरा बेटा सदैव सकारात्मक बात करता
‘मम्मी ये समय भी बीत जाएगा’ ❤️🙏
परिवार ,मित्र यहां तक कि पड़ोसी भी अंर्तजाल के माध्यम से जुड़े हुए थे जो एक सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत रहा
TV पर समाचार भी केवल एक बार देख रहे थे
पल-पल सकारात्मक रहने की लड़ाई अपने आप से ही थी
अप्रैल, मई ऐसे ही बीता घर से निकलना कठिन हो गया था। 2-3 दिन में एक बार जाकर दूध, सब्ज़ी जैसी आवश्यक वस्तुएं लाना भी तनाव भरा कार्य था 😊
सामान्य जीवन अपना अस्तित्व खो रहा था
जीवन में बहुत से परिवर्तन हो रहे थे
हम अपने दृष्टिकोण से कुछ को अच्छा नही मानते तो कुछ मन को भा गए 😊 हैं दोनो ही ईश्वर का वरदान😇
जीवन तो दोनो से ही प्रभावित होगा और हो रहा है
एक अच्छी बात पतिदेव सिगरेट जैसे व्यसन से मुक्त हो गए 👌🏼
कठिन समय ने बहुत ही सीमित साधनों में जीवन यापन सिखा दिया
बहुत कम आवश्यकताएं हैं हमारी, हमने पांव बेकार ही पसार रखे हैं
प्रकृति को हंसते-खिलखिलाते बचपन के बाद अब देखा
वर्षों बाद 🤔
एक युवा हो गयी पीढ़ी के लिए भी ये अनुभव सुखद रहा
पंछियों का चहचहाहट के साथ नील गगन में विचरण महानगर में स्वप्न साकार जैसा है
दानवीर कर्मठ योद्धाओं का पराक्रम भी देखा और सुना
कोरोना के कठिन समय ने निस्वार्थभाव और मानवता को सक्रिय कर दिया
आर्थिक रूप से जर्जर हो चुकी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए ,सामाजिक स्तर पर कई लोगों को सम्बल बनते देखा है मैंने 👍
यथासम्भव लोग सहयोगी मुद्रा में दिखे
सभी की पाककला में अभूत पूर्व निखार हुआ
कई जटिल व्यंजन तो मुझे स्वयं सरल लगने लगे हैं
समाज के सकारात्मक पक्ष उभर कर सामने आए हैं
यूं अपवाद हर जगह होते हैं परंतु समाज का एक अच्छा स्वरूप देखने को मिला
एकजुटता देखी, चिंता देखी 😊
बुरे समय के अनुभव हमें बहुत कुछ सिखा जाते हैं
एक बड़ा वर्ग जूझ रहा है विजयी होने के लिए
आज भी कोरोना मुक्त नही हैं हम, परन्तु जीवन रुकता नही, तो चल पड़ा है अपनी राह
मुझे विश्वास है शीघ्र ही हम इस महामारी को पराजित कर अपनी अपनी ‘अनुभव पोटलियों’ के साथ आगे बढ़ जाएंगे और सब मिल शीघ्र ही खिलखलायेंगे
असमय साथ छोड़ गए लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि
देते हुए
कोरोना को इतिहास बनते देखने की प्रतीक्षा में
#कोरोना2020

लेखिका : अरुणा संतोष सक्सेना