मेरा कोरोना वर्ष अनुभव -7

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अभूतपूर्व यानी जो पहले न हुआ हो, कोरोना जिसका नामकरण किया गया है कोविड19, ये तो जरूर अभूतपूर्व है हम सभी के जीवनकाल में।

शायद हमें ऐसे अनुभव भी हासिल करने थे जब समय रुका हुआ सा प्रतीत होगा। मेरा तो मानना है दुनिया इक्कीसवीं सदी में जिस गति से भागती हुई सी महसूस हो रही थी तो एक ब्रेक लगना ही था। हमने तो अपने बचपन में काफी धीमी जीवन शैली ही देखी थी, अलस्सुबह और ढलती शाम को हर घर से चूल्हे का धुआं उठते देखा है और अलसायी दुपहरियों में महिला गोष्ठी भी देखी है। लेकिन आज की पीढ़ी बचपन से ही नम्बरों के मायाजाल में उलझी, तरह तरह के क्लास में हाजिरी लगाती अधिकांशतः मायूस ही नजर आती है और ये लॉकडाउन इस नई पीढ़ी के लिए एक राहत भरा समय ही लेकर आया है जब पूरा परिवार एक दूसरे को समय दे पा रहा है।

लेकिन मेरी पूरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ है जो इस बीमारी के कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से घोर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इस अचानक आयी विपदा से लोगों की आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों की कोई सीमा नहीं है। इसी बात को समझकर लॉकडाउन काल का सम्पूर्ण वेतन हमने अपने घर में कार्यरत सहयोगियों को समय पर दिया। ईश्वर से यही प्रार्थना है जल्द से जल्द वैक्सीन बन जाये और हम पुनः खुली हवा में सांस लें।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव इस कोरोना काल में मिला जुला यानी थोड़ी चिंता और थोड़ा सुकून लिए ही रहा। चिंता इसलिए कि डॉक्टर पतिदेव राज्य के सर्वोच्च सरकारी अस्पताल में जिसे कोविड अस्पताल बनाया गया है, वहां रोजाना काम कर रहे हैं, पर सुकून इसलिए कि मुझे अपने लिए कुछ समय मिल पाया जब मैंने प्रवीणा जोशी जी की पहल पर मुक्ति सखी से मिथिला पेंटिंग सीखना शुरू किया और कुछ सृजन सुख प्राप्त किया। सााा ही सार्थक शुरुआत केेर ऑनलाइन समर क्लासेज में भी खुद को शामिल कर मैंने बहुत सारी नई कलाएं सीखी। थोड़ी सिलाई आती है सो शुरुआत में मास्क भी बनाया। बहुत जमाने बाद घर और परिवार को अधिक समय देना भी इन दिनों ही सम्भव हो पाया।

चूंकि अध्ययन करना मुझे बहुत पसंद है तो मैं अभी अपने विषय एजुकेशन पर कुछ अधिक समय लेखन पठन भी कर पा रही हूं। कुकिंग की बात करूं तो बेटा घर पर है सो स्वाभाविक है कि उसकी पसन्द के व्यंजन बनाती रहती हूँ। हाँ, सुखद बात यह भी है कि बेटे को भी कुकिंग में काफी रुचि पुनः जागृत हो गई जो उसके कॉलेज व कानून की पढ़ाई में व्यस्त रहने के कारण छूट सी गयी थी और अब मुझे भी अचानक सरप्राइज मिल जाता है और किसी खास डिश की तो रेसिपी भी उससे पूछनी पड़ती है।
घर में उम्रदराज सासु मां भी हैं जिनकी सेहत और खानपान का विशेष ध्यान रखना अभी हमारी प्राथमिकता है, सबसे मजेदार तो तब होता है, जब वो पूछती हैं कोरोना गया क्या

लेखिका- पूनम झा