मेरा कोरोना वर्ष अनुभव – 10

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#कोरोना वर्ष मेरे लिए …
सच में जब यह वर्ष आरम्भ हुआ था तो इसे २०-२० खेल की उपाधि से नवाज़ा गया था और धारणा यह बनी थी की इस खेल की तरह यह वर्ष भी पलक झपकते गुज़र जाएगा ।परन्तु कोई यह नहीं सोच सकता था की यह वर्ष हमें इतना हैरान परेशान कर देगा । कोरोना जैसी भयानक और अदृश्य बीमारी भी इसके साथ आएगी यह तो दूर दूर तक सबकी सोच से परे था ।समय के इस पड़ाव को जिसे हमने लॉक डाऊन में बाँट के व्यतीत किया यह अपने में अविस्मरणीय है ।बच्चे ,बूढ़े ,जवान ,स्त्री हों या पुरुष , अमीर या गरीब सभी इससे ग्रसित और आतंकित हैं ।मैं एक शिक्षिका हूँ और थोड़ा धैर्यवान भी ।वैसे भी महिलाओं को तो हर परिस्थिति से जूझना आता है ।सबसे अच्छी बात यह थी की कई बाहर पढ़ने वाले बच्चे होली के त्यौहार पर घर आए थे और उन्हें वापस ही नहीं जाना पड़ा जिससे की माता पिता की आधी चिंता दूर हो गयी, जैसे ही पहला लॉक डाऊन हुआ सब अपने अपने घर के अंदर थे ।जो लोग जहां थे वो वहीँ रुक गए और सुरक्षित हो गए ।प्रभु कृपा सबपर बनी रहे बस यही चाहती हूँ और हमारी श्रद्धा और विश्वास कभी ना डगमगाए ।मैंने भी इस कोरोना काल का बहुत लुत्फ़ उठाया ।कुछ अच्छे ग्रुप में ऑनलाइन सम्मिलित हुई, ढेरों कवितायेँ लिखी, अच्छे दोस्त बनाए, और अपना और अपनी अनदेखी सखियों का मनोरंजन किया । इसी दौरान मैंने कई नए व्यंजन बनाए और बच्चों को बहुत आनंद आया ।बच्चों को भी कुछ नया बनाने और करने का जोश आया ।घर में रहने का मजा तो जरूर आया मगर कुछ दिन में ही जब कोई कामवाली नहीं आ रही थी तो जोश थोड़ा कम भी होने लगा ।तब बच्चों और पति ने अपनी सहयोगिता दिखाई और सबने घर के काम में हाथ बँटाया । फिर हम सबने एक और अच्छी आदत को हमसाथ किया और वो था योगा का ।हम नित्य सुबह आधा घंटा योगा करते और काढ़ा पीते ।एक बात और भी इस समय की ख़ास थी की हम बिना कुछ खरीदारी के भी कितना सुकून में हैं और होटलों के खाने से खुद को विरक्त कर ले गए ।फ़िज़ूल का खर्चा नहीं कर रहे और अपने परिवार के बड़े बुज़ुर्गों को कुछ अच्छा समय दे पाए ।इस पूरे कोरोना काल में हमारा सबसे ज्यादा सहयोगी रहा हमारा फ़ोन जो हमें हमसे दूर रह रहे हमारे माता पिता, भाई बंधु और मित्रों से जोड़े रखा ।हमें अपने प्रधानमंत्री मोदी जी पर गर्व है की सही समय पर लॉक डाऊन कर के उन्होंने लाखों भारतवासियों की जान बचा ली ।मास्क पहनना अनिवार्य हो गया और हमने कई मास्क घर पर बचे साफ़ कपडे से भी बना डाले । अगर कोई अच्छा काम किया तो वो था की हमने अपनी कामवाली का वेतन नहीं काटा बल्कि उसे बुला कर दिया । अच्छे विचार ,अच्छे कर्म ,और स्वच्छ आचरण से हम खुद को सुशोभित रखें तो बुरे से बुरा समय भी हँसते हुए और साथ मिलकर कट जाता है यही सिखा गया यह कोरोना हमको ।जो लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं मैं उनकी शीघ्र ठीक होने की कामना करती हूँ और जो इसकी वजह से हमसे बहुत दूर चले गए उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करती हूँ
अंत में बस यही चाहती हूँ की यह अदृश्य उपद्रव हमारी धरती से जल्द जाए और हम सब फिर एक सुखमयी और निश्चिन्त जिंदगी जी सकें ।    लेेेखिका-    ऋचा पांडेय