मेरा कोरोना अनुभव – 5

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कोरोना विषाणु के कारण बिल्कुल ही अलग तरह के अनुभव हुए हैं सभी को| कुछ आप सबसे सांझा करना चाहूंगी

1) जैसे ही लाकडाउन हुआ, सबसे पहले तो काम वाली बाई को आने से मना करते हुए उसका चेहरा देख कर दिल दुखा, खैर उसको भी इससे बचाव के बारे में समझा कर कुछ एडवांस देकर विदा किया गया| अब समस्या घर के सभी काम करने की। सभी को काम बांट दिये गए और जिस सदस्य ने कभी किसी काम को करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, उसने भी पूर्णतया सहयोग दिया|

2) उन्नीस वर्षीय बेटे को घर में टिकाना बड़ा मुश्किल काम था मेरे लिए, रोज़ाना ही किसी न किसी बहाने दोस्तों से मिलने निकल ही जाता था| एक दिन जब काफ़ी देर तक नहीं लौटा तो फ़ोन पर पर मेरे बहुत डांटने पर, उसने मुझे वीडियो भेजी जिसमें वह दोस्तों के साथ झुग्गी बस्ती में खाने की चीज़ें बांट रहा था, जिसके लिए इन लोगों ने पिछले एक सप्ताह भाग दौड़ करके सहमति सर्टिफिकेट बनवाया था |

3) इन हालातों में विद्यालय में खाना बांटने की ड्यूटी में भी पतिदेव का भरपूर सहयोग मिला |

4) फिर एक दिन एक छात्रा के पिता का फ़ोन आया कि उनका बैग बनाने का काम भी इन दिनों नहीं है और तीन माह से किराया न दे पाने के कारण उनको बिहार जाना है| पूछने पर बताया कि दसवीं के जो दो पेपर रह गए हैं, उसके लिए फिर से बच्ची को लेकर वापस दिल्ली आएंगे जुलाई में|अगले दिन उनको अर्जी देने स्कूल बुलाया गया और कुछ रुपये देकर भेजा गया| वो तो अच्छा हुआ कि अब वो पेपर स्थगित हो गए|

5) मेरी हड्डियों के दर्द ने भी इन दिनों आतंक मचा रखा था, आखिर कब तक टालती हस्पताल जाकर डाक्टर को दिखाना, तो जाना ही पड़ा डरते डरते| वहां पहुँचते ही पी.पी.ई., किट में कर्मचारियों को देख डर सी गई क्योंकि अब तक ऐसा टी.वी. में ही देखा था| अगले दिन एम, आर, आइ, के लिए फिर से बुलाया गया था, तीन दिन लगातार जाना ही पड़ा| अब काम वाली को भी न चाहते हुए भी वापस बुलाना पड़ा.|

6) इन दिनों घर का ज़रूरी सामान मंगवाना और वो भी पूरी एहतियात के साथ कम जोखिम भरा नहीं| फिर फल, सब्जियां जितना भी किटाणु या विषाणु मुक्त करने के उपाय कर लो, तब भी मन में एक वहम सा रहता ही है |
इन दिनों कम खर्च में भी गुज़ारा हो जाता है, अनावश्यक खर्चे कम करके, यह भी अनुभव हो गया |

7) कहीं ज़रूरी जाना भी पड़ता है तो मास्क, अच्छे से अच्छे में भी दम सा घुटता है, मगर कुछ नहीं कर सकते |

8) अब समस्या एक और आनलाइन कक्षा लेकर पढा़ने की | पहले हम अध्यापकों की आनलाइन मीटिंग हुई, अनोखा मगर अच्छा और नया अनुभव|

सभी बच्चे अभी भी नहीं कर पा रहे है, बहुत दिक्कत है उनके लिए, किसी के पास इंटरनेट वाला फ़ोन नहीं और जिनके पास है, नेट पैक के लिए पैसे नहीं क्योंकि इन दिनों अभिभावकों के पास काम नहीं |कल ही एक बच्चे को काम न करने के लिए फ़ोन पर डांटा तो उसकी माँ का जवाब सुन मेरा दिल बहुत रोया | दोनों बेटियों के पास कापियाँ खरीदने के भी पैसे नहीं | उनका पता पूछ कर अभी कुछ सहायता भेजी है उन्हें, बहुत झिझक रहे थे वो इसे स्वीकार करते हुए, अच्छा परिवार है, मगर नौकरी जा चुकी है |

जाने कब तक चलेगा यह चुनौतियों और मुशकिलों भरा दौर | जाने कम थमेगा यह सब | अपना ध्यान रखिए और दूसरों का भी| आप सब से भी यही गुज़ारिश है कि इस समय ऊंच -नीच, जात-पात सब भूल कर ज़रूरतमंदों की मदद कीजिये और बस इंसानियत का फर्ज़ निभाइए|

लेखिका – रेणु धवन कपूर