मेरा कोरोना अनुभव – 3 मेरा दुःखद अनुभव

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मेरे पति देव की चौथी बरसी थी,हमारे में उस दिन हवन होता है,,कोई पंडित घर आने के लिए तैयार नही था,,किसी की जान पहचान से गायत्री परिवार के मंदिर में हवन के लिए इज़ाज़त मिली ,,सिर्फ 4 लोगों को,,मैं ,मेरी बेटी,दामाद और बहू गए,,वहां जा के देखा 2 अलग अलग हवन कुंड बने थे और एक ओर फैमिली हवन के लिए वहां आई थी ,,पंडित जी उनके साथ बैठे और हमे सहायक मिला,,,,

उस फैमिली में नया मेहमान आने वाला था इसलिए हवन हो रा था और हमारा हवन आत्मा की शांति के लिए था,,और पंडित जी कभी उन्हें कुछ करने को कहते कभी हमे,,पंडित जी के कहने पर ,बीच बीच मे हम खड़े होके उनको आशीर्वाद भी देते और फूल भी बरसाते,,ऐसी पूजा से मन अशांत रहा ,,पूजा खत्म हुई,,,दामाद ने बोला कि मम्मा हम पापा को श्रद्धांजलि देने गए थे की किसी को आशीर्वाद,,मेरा मन अशांत था,पर मैंने समझाया कि बेटा कोई बात नही,,किसी को आशीर्वाद देने का मौका भी किस्मत वालों को ही मिलता हैं,पता नही उस घर मे जो मेहमान आ रा है उससे हमारा क्या रिश्ता है जो एक ही टाइम पे ये दो हवन हुए,,एक तरफ से हमारी आहुति और दूसरी तरफ हमारा आशीर्वाद 😢,,

उस परिवार के बारे में सोचो ,हमसे भी ज़्यादा तकलीफ में होगा,,जिसने खुशी के साथ हमारे हवन में वो किया जो पंडित ने बोला,शायद हम दोनों परिवारों के मन में कुछ तो भारीपन था जो हम ले के उठे ।

आखिर पंडित जी बोले आप लोग एक दूसरे को प्रशाद बांट दो,,जो भी साथ लाये हो,,हमने तो उनका प्रशाद ले लिया,,पर अपना प्रशाद उन लोगो को देने की मेरी हिमत नही हुई,,ये सोच कर की कहीं वो लोग वहम ना करें,,आखिर उनके घर नया मेहमान आने वाला था,,ईसलिये सारा प्रशाद शायद मंदिर में भगवान के चरणों मे छोड़ आए ।

कोरोना की वजह से ये दुखद अनुभव कभी भूलूंगी नही !

मन आज भी अशांत हो जाता है ये सोच कर की उन्हें ठीक से श्रधांजलि भी नही दे सकी…

घर आ के भावनाओं के सैलाब को रोक ना सकी और वीडियो के ज़रिए अपने ज़ज़्बात इस वीडियो में डाल के दिल से श्रद्धा्जली दी।

लेखिका – नीरा भंडारी