मेडिकल रिपोर्ट की भूल बनी टॉर्चर- मेरा कोरोना वर्ष अनुभव20

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#कोरोना#अनुभव
जय श्री कृष्णा सखियो🙏 मैं Deepa Bohra जोधपुर राजस्थान से।
मेरा कोरोना अनुभव
22 मार्च से लोकड़ाउन स्टार्ट हुआ। बड़े बेटे के फाइनल एग्जाम नहीं हुए थे तो थोड़ी चिंता हुई की अब क्या होगा। फिर पता चला कि अब एग्जाम नहीं होंगे। छोटे बेटे का पहला साल था स्कूल का 26 मार्च से उसे जाना था पर कोरोना के चलते स्कूल बंद हो गए। पतिदेव का काम काज नोटेबन्दी के बाद से थोड़ा डांवाडोल ही चल रहा था कोरोना के चलते ठप्प सा पड़ गया। लोकडाऊन के शुरूआती दिनो में तो अच्छा लगा क्योंकि सब ठीक चल रहा था। पतिदेव घर पे थे। रोज़ मिल कर नयी नयी डिशेज़ बनाते। फॉटो व्हातसअप्प पे अपलोड करते। तारीफे बटोरते। बच्चे भी खुश के स्कूल नहीं जाना। कमाई की चिंता तो हरदम थी । पर फिर भी जिंदगी चल रही थी। न्यूज़ देखते तब चिंता बढ़ जाती। जो लोग इस आपदा का शिकार हुए। जिनको खाने पीने की रहने की अपने घर जाने के लिए परेशानी हुई उनके लिए बुरा लगता भगवान से प्रार्थना भी करते के सभी का कल्याण करो। सभी की रक्षा करो। हमारी जिंदगी में भी ईस #कोरोना ने बड़ी तबाही सी मचाई। मेरे ससुरजी जो की रिटायर्ड नर्सिंग सुपरिडेंट है वो 22 अप्रैल को चला कर कोरोना टेस्ट करवाने गए थे । क्योंकि को खुद 60+ है साथ ही घर पे 85+दादीजी थे छोटे बच्चे थे। वो डाएबीटीज और बीपी पेशेंट है। पर उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही थी जैसी कोरोना पेशेंट को होती है। 2 मई को दादीजी की तबियत रात को थोड़ी ख़राब हो गई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उन्हें हॉस्पिटल ले जाना चाहा पर वो बोले नहीं मुझे कही नहीं जाना अब मैं चली जाउंगी। 3 मई को सुबह कुछ ठीक थी उनकी तबियत। शाम को 4 बजे दादीजी ने अपनी अंतिम सांस ली। ससुरजी ने प्लस देख कर डिक्लेयर किया कि दादीजी अब हमारे बीच नहीं रहे। तभी उनके फ़ोन पर कलेक्टर ऑफिस से फ़ोन आया की आपने जो अपना कोरोना टेस्ट करवाया था वो पॉजिटिव आया है। पापा ने उन्हें कहा कि मुझे टेस्ट करवाए 13 दिन हो गए है आप अब रिपोर्ट दे रहे हो तो वो बोले रोज़ इतने टेस्ट होते है टाइम लगता है।😠( हम लोग अलग रहते है।) पापा ने हमें फ़ोन करके आने को मना कर दिया पर मेरे हस्बैंड वहां पहुँच गए आखिर उनकी दादी थी😢।पापा ने खुद मेडिकल टीम को और हॉस्पिटल फ़ोन किया उन्हें सुचना दी। टीम आई एक एम्बुलेंस में पापा को ले गई एक में दादीजी की बॉडी को। इनको (हसबैंड) अपने घर जाने के लिए बोल दिया। घर को सील कर दिया। अगले दिन दादीजी की बॉडी का टेस्ट हुआ। हमें बोला गया कि 4 दिन बाद रिपोर्ट देंगे। आप सभी को पता ही होगा की मृत्यु के बाद दाहसंस्कार जल्द से जल्द करना चाहिए नहीं तो इंसान को मोक्ष नहीं मिलता। चूँकि पापा मेडिकल लाइन से ही है तो जान पहचान निकाल कर दादीजी की रिपोर्ट जल्दी देने को कहा। नेक्स्ट डे 4 मई को शाम 5 बजे दादीजी की रिपोर्ट आई भगवान की दया से रिपोर्ट नेगेटिव आई। हमें बॉडी दे दी गई हमने विधि पूर्वक दाह संस्कार कर दिया😢।घर पे बाहर से कोई चीज़ लेने नहीं दे रहे थे। मेरे देवर का बेटा ढाई साल का है उसके लिए दूध भी लेने नहीं दिया। पुलिस वालों को बोला मिन्नतें की छोटा बच्चा है दूध लेने दो पर उन्होंने मना कर दिया। पापा को 13 दिन हो गए थे टेस्ट करवाए हुए उन्हें बोला 2 दिन बाद आपका फिर टेस्ट किया जाएगा। घर वालो के बार बार प्रेशर डालने पर उन लोगो की टेस्टिंग की गई। प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा कैसे मेरी फॅमिली को भुगतना पड़ा आप देखिये। नेक्स्ट डे पापा को अलग क्वारंटाइन सेण्टर में शिफ्ट किया गया क्योंकि उनमे कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे। होते भी कैसे वो 22 मार्च से ना तो घर से बाहर गए ना कोई घर में आया। वहां शिफ्ट होने के बाद पापा के पास फिर से कलेक्टर ऑफिस से फ़ोन आता है कि आप महेंद्र सिंह बोल रहे है। तो पापा ने कहा में महेंद्र कुमार बोहरा बोल रहा हु। अगला बन्दा बोलता है कि सॉरी महेंद्र सिंह पॉजिटिव थे नाम में गलतफहमी हो गई। पापा ने तुरंत इसकी सूचना वहाँ हाजिर मेडिकल टीम को दी। उन्होंने बोला आपको पॉजिटिव लोगो के साथ रहते हुए 3 दिन हो गए है इसलिए एक बार जाँच होनी जरूरी है। प्रशासन की लापरवाही की वजह से पापा की दूसरी जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई😢।पर अभी भी उनमे कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। भगवान की दया से घर पे सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई🙏। पापा अपने खाने पीने में पहले से बहुत परहेज रखते हे। योग करते है। इसलिए 4 दिन बाद जब पापा का फिर से टेस्ट किया वो नेगेटिव आया। इसलिए टीम ने 2 दिन बाद वापस उनका टेस्ट लिया। भगवान की अनुकंपा घर के बडो के आशीर्वाद और आप सभी सखियो की प्रार्थना काम आई पापा का ये टेस्ट भी नेगेटिव आया उनको छुट्टी दे दी गईं। वो सकुशल घर आ गए। पशासन की लापरवाही की वजह से जो खामियाजा मेरे ससुरजी को उठाना पड़ा वो भगवान किसी के साथ ना करे। सभी सकुशल रहे भगवान से यही प्रार्थना है।

लेखिका – दीपा बोहरा