डर के साथ जीने की पड़ी आदत- मेरा कोरोना वर्ष अनुभव 58

sakhi talk आ सखी चुगली करें

मैं जोधपुर जिले के फलोदी शहर में रहती हूँ । जब 14 मार्च को अख़बार में पढ़ा कि स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां कर दी गयी है तो तुरंत जोधपुर से बेटी को बुला लिया। जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की गयी इससे पहले पतिदेव ने अपनी टीम के साथ जागरूकता अभियान शुरू कर दिया था ।

ये एक NGO दूसरा दशक में काम करते हैं। समाज के साथ काम करना इनका पहला धर्म है सो ये फलोदी और गांवो में सभी कार्यकर्ताओं के साथ जागरूकता अभियान में लग गए । लेकिन मैं और बच्चे डरने लगे और कहने लगे कि आप बाहर मत जाओ । तब इन्होंने समझाया कि हमारा फर्ज़ है सेवा करना और तुम सब मेरा साथ दो। सब घर में रहेंगे तो काम कौन करेगा ।

हमें बहुत चिंता लगी रहती थी। फलोदी के व अन्य शहरों में रहने वाले घर परिवार वाले भी बोलते थे कि बाहर नहीं जाए। फिर बाद में हम सब को कोरोना के डर के साथ रहने की आदत हो गयी।

इस संकट में इन्होंने अपने साथी कार्यकर्ताओं के साथ गरीब परिवार, और लॉकडाउन में फंसे वो लोग जो बाहर के राज्यों से खेतों में काम करने आतें हैं, इन सब के लिए राशन-पानी,भोजन के लिए बर्तन,ठन्डे पानी के लिए मटकी,चप्पल, कपड़े और पढ़ने के लिए कहानियों की किताबें देने का बंदोबस्त किया। छोटे बच्चों के लिए पास पड़ोस से मांगकर खिलौने भी दिए । Sanitary Napkins और साबुन भी बाटे।

बच्चों को भी साथ ले गए और दिखाया कि मजदूर कैसे रह रहे हैं। उनको करीब से देखा महसूस किया और हम सब भी इस अभियान में शामिल हो गए।

जो अत्याधिक गरीब हैं उन धात्री महिलाओं के लिए सुवाड़ का सामान दे रहे हैं। सामर्थ्य और शारारिक शक्ति अनुसार हमने भी जिनको जरुरत थी उनकी मदद की और परम संतोष महसूस किया।

इसी के साथ एक और घटना घटी। जोधपुर में मम्मी के गिरने से कमर में फ्रैक्चर हो गया। सुना तब से बिलकुल भी मन नहीं लगता था। मन उदास उदास रहता था। बच्चों ने और इन्होंने बहुत संबल दिया। लॉकडाउन में ढील दी गयी तब मम्मी से मिल कर आये। अब काफी ठीक है।

ईश्वर से यही प्राथना है कि सभी का भला हो और सभी घर पर रहें सतर्क रहें स्वस्थ रहें। इस कोरोना काल में हमें दृढ़ता से मुकाबला करना है, बीमारी से, आर्थिक चुनौतियों से और अन्य समस्यायों से भी।

इसी के साथ प्रवीना जोशी जी को धन्यवाद जिन्होंने हमें लिखने के लिए प्रेरित किया।

लेखिका किरण थानवी