आज भाजपा से अधिक विपक्ष को राम मंदिर की जरूरत है

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राम मंदिर एक राजनैतिक लक्ष्य है, भाजपा हासिल कर लेती है तो उसके बाद कोई भाजपा को वोट क्यों दे??

अगर राम मंदिर चुनाव से एक साल पहले भी बन चुका होता तो देश मे जातिगत राजनीति लोकसभा चुनाव की दिशा तय करती, इसमें विपक्ष को ही लीड मिलती।

अब चुनाव के वक़्त अगर राम मंदिर मुद्दा गर्म रहे लेकिन मंदिर ना बने तो विपक्ष का वोट बैंक भ्रमित रहेगा।

भाजपा को मुस्लिम वोट किसी सूरत में नहीं देंगे, लेकिन पूर्वोत्तर, दक्षिण और उत्तरप्रदेश-बिहार के वोटर को राज्य और केंद्र में अंतर बताए रखना भाजपा-मो की सफलता सिद्ध होगी।

छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में फिर से भाजपा आने के संकेत बताए जा रहे हैं, राजस्थान में आज की तारीख में कांटे की टक्कर बताई जा रही है, मोदी की रैलियों का इंतज़ार है।

वर्तमान चुनावों में राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन स्पष्ट कर देगा कि मोदी को हिंदी पट्टी में कितनी मेहनत करनी है।

विपक्ष अधिकांशतः नायडू और ममता पर निर्भर है, लेकिन दोनों को मोदी ने पिन कर रखा है, और मुख्य विपक्ष भाजपा ने ही कांग्रेस को बनाया हुआ है, जो सबसे हल्का घोड़ा है।

कुछ दिन में सट्टा बाजार का रुझान आने पर स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।