पद्मावत और हिंदू मानस

Chanderi Jauhar Smarak Padmavat and hindu sentiments

बहुत छोटे थे जब पिताजी ने हमको रनजीत देसाई की पेशवामाधवराव पर लिखी पुस्तक ” स्वामी”पढ़ने दी उसमे बिलकुल अंत मे जब माधवराव पेशवा के देहांत के बाद उनकी पत्नि उनकी देह के साथ सती होने के लिये जाती हैं तो सब लोग उनका पदवंदन करने आते हैं प्रसिद्ध विद्वान और पेशवाओं के न्यायाधीश रामशास्त्री जब उनको नमस्कार करने आते हैं तब पेशवेइन बाई उनको वरिष्ठजन कहती हैं कि मैने अपने पति के साथ कई बार आपके चरण छुये हैं और पदवंदना की वर्जना करती हैं, तब राम शास्त्री उत्तर देते हैं…

“माता! वो समय अलग था अब देवता भी आपके चरन छुएं ऐसा स्थान है आपका “

यह पंक्ति पढ़ कर दिमाग झनझना गया था हमारा, हमने दद्दा से पूछा की क्या इतना महत्व है सती का?

तब दद्दा ने उनके ननिहाल की एक कहानी हमको सुनाई की पीढ़ीयों पहले उनके ननिहाल मे एक निसंतान मेहतर स्त्री पति के साथ सती होने चलीं तो दद्दा के ननिहाल के मुखिया की पत्नि ने अपना हाल जन्मा बालक उनकी गोद मे दे दिया की उन मेहतर स्त्री का प्रण छूट जावे, पर उस बालक के गोद मे आने पर उन माता का चेहरा और दिव्यतेज से दपदपा गया और उनने लोगो से कहा

“मेरे मन मे एक ही दुख रहता की निसंतान रही मैं पर अब वह भी मिट गया और अब कोई भी मंसा मन मे ना रही “

यह कहके उनने अपने कलेजे से बालक को लगाया और उसकी मां के गोद मे दे दिया यह कहकर की जब तक येबच्चा और इसका वंश धर्म मे दृढ़ रहेगा तबतक लक्ष्मी सरस्वती इनके आंगननमे खेलेंगी और जब अपने नियम से हटेंगे तो वंशबेल सूख जायेगी
दद्दा के ननिहाल मे उन सती माता की आन अब तक रही।

दद्दा कहने लगे की सती मतलब है सकल हिन्दुसमाज का गौरव

उसके बाद उनने चंदेरी ,चित्तौड़के साके और जौहर की कहानिया सुनाईं हमारा माथा गरम होगया था विवरण जानकर सुनकर जो मन मे समाया वो रक्त का अंश बन गया।

खैर प्रकरण किस लिये निकल रहा है ये बताने की जरूरत नही, गर्हित फिल्म प्रकरण मे जिस तरह अपनी राजपूत समाज सम्मान के लिये लड़रहा है और हिन्दुसमाज के हर तबके से लोग उनका साथ दे रहे हैं। पर कुछ वर्ग ऐसे हैं जो इस प्रकरण पर राजपूतो पर व्यंग करने , आरोप लगाने और बदनाम करने से बाज नही आ रहे। उस पर कुछ लोग इस मूवी को देखकर बहुत शान से इसका प्रचार कर रहे हैं। परसों मित्र सूची के एक पढ़े लिखे , धार्मिक , इतिहास के जानकार दिल्ली वाली युवा ने पोस्ट किया की…

“पुलिस पहरे मे मूवी देखने का पहली बार अनुभव किया”

हमने पढ़ा और कमेंट मे अनायास लिख दिया की धिक्कार है तुम पर, यह कहके अनफ्रैंड कर दिया, इनबॉक्स मे उसने हमसे कहा की…

“वो पिक्चर देखी है क्योंकी हम सब जानते है अच्छी तरह से “

हमने बहस नही करी क्योंकी वह यही दलील देता की पद्मावत तो जायसी का रचा है ऐतिहासिक नही है पद्मावती काल्पनिक चरित्र थी”

उसके ऐतिहासिक ज्ञान को पद्मावती के काल्पनिक होने का तो ज्ञान रहा पर खिलजी के हमले मे जो सोलह हजार स्त्री रत्नो ने स्वतंत्रता और धर्माभिमान के होम मे स्वआज्य की आहुति दी इस विषय को भूल गया। ऐतिहासिक नजरिये भी से देखें तो उन सोलहहजार स्त्रियो की समग्रचेतना का मूर्त रूप महारानी पद्मावती हैं। खैर हम ही गलती कर गये की तिलक और धार्मिक रीती रिवाज निभाने भर से किसी व्यक्ति मे स्वाभिमान और धर्मगौरव के भी गुण हों जरूरी तो नहीं

हमने लिख दिया कि…

“जिसमे अपने धर्म का गौरवानुभव ही नही उससे कैसा भी सम्बंध हम नही रख सकते “

उसके बाद कई बड़े शहरो मे मल्टिप्लेक्स मे लगी कूड ड्यूड और ड्यूडनियो की लाइन के पिक देखे हमने रह रह के खून खौल गया। ये हैं भारत के युवाशक्ति जो लव पद्मावत , लव रनवीर खिलजी के हैशटैग के साथ पोस्ट डालकर नंगई काप्रदर्शन कररहे हैं। वहीं उसी समय सुनने को मिला की कासगंज मे एक युवा को तिरंगा लहराने पर गोली मार दी गई मुसलमानो द्वारा जब उस बच्चे का पिक हमने Devendra भैय्या के वॉल पर देखा तो काळजा मुंह को आ गया। नन्हा सा बच्चा था शायद दाड़ी मूंछ आने शुरू ही हुये थे। इसके मां-बाप पर क्या बीत रही होगी कल्पना करना असंभव है।

इस पर कुछ स्मरण हुआ जब बाबर मे मालवा अपने हाथ मे लेनेके लिये चंदेरी के कीर्तीपाल दूर्ग पर हमला किया तब वहां के शासक महाराज मेदिनीरायथे जिनको मेवाड़के महाराणा सांगा का संरक्षकत्व प्राप्त था। महाराणा सहायता को मेदिनराय की तरफ बढ़े भी पर कालपी के निकट उनकी मृत्यु विष देने से हो गई। जो भवतिव्य था वो हुआ, अंदर जौहर कुंड पर स्त्रियों ने जौहर रचा और समस्त पुरूषो ने वासंती पाग पहन कर साका कर धरा पावन कर दी, बाबर को इस हमले मे कुछमहाराज मेदिनीराय के परिवार और निकट के भीतरघातियों का सहयोग मिला था, दुर्ग जीतने के बाद उनका इतिहास कार लिखता है की चंदेरी के रास्तो पर बाबर ने विजय यात्रा निकाली, और कुछ राजकुमारो को नपुंसक बनवा कर शाहि हाथी के सामने नचवाया गया, पर यहां पर लोक मे प्रचलित बात अलग होती है लोक मानस कहता है की उस साके मे महाराज मेदिनीराय का सम्पूर्ण कुल वीरगति को सूर्यलोक को प्रयाण किया, जिन राजपुरूषो को बाबर ने हिजड़ा बनवा कर अपने हाथी के सामने नचवाते जलूस निकलवाया वे सब वही भीतरघाती कापुरूष थे जिन्होने मेदिनाराय के विरूद्ध बाबर को छुप कर सहायता दी थी

अस्तु निष्कर्ष निकला की जो लोग अपना तन मन धन लगाकर इन गर्हित प्रकरण का विरोध कर रहे हैं वे आज हारे हुये और हताश मनलग सकते हैं पर जो हो वो और हम सब अपने मन में यही संतुष्टि लेकर तो रहेंगे की गलत को गलत कहने की हिम्मत है हममेंं, चाहे सरकार मे आज वही बैठें है जो धर्म और गौरव का दम भरते थे कभी पर वो भी इस भांडमंडली के चंडमुंड बनकर द्वारपाल बने खड़े हैं और निहत्थे राजपूतो पर लाठियां बरसवा रहे हैं। पर सुकून है की इन लाठी गाली खाते लोगो ने सेक्यूलरत्व, कूलड्यूडत्व, ग्लैमर ,चकाचौंध, अल्ट्रा बुद्धिजीवीता के फेर मे पड़ कर अपनी मांओ के दूध को तो नही लजाया। हम लोग आज हारे से बैठें है आने वाले समय मे भी हमसब ही लड़ेगे हो सकता है मारे भी जायें। पर जो लोग आज उस भांड तमाशे के पक्ष मे अपने ग्लैमरस बुद्धिजीविता मे इतरा रहे हैं उनका हश्र मे वे विधर्मी नव बाबर ,आलमगीर के विजयी जलूस मे हीजड़े या गिलमे बन कर नाचना लिखा है।

आखिर मे उन महापुरूषो को भी दंडौत तो इस प्रकरण मे समग्र हिन्दू समाज के रूप मे राजपूतो के नेतृत्व मे साथ खड़े अन्य वर्गो यथा ब्राह्मण, वैश्य इनको भरपूर अपशब्द कह रहे हैं। यहां तक की भगवान परशराम तक को श्लील अश्लील उपमान देकर हिन्दु समाज को तिलजल सहित पिंडदान मे सहयोग कर रहे हैं

(चित्र मे चंदेरी का जौहर स्मारक जिन कूल ड्यूडों को साके जौहर का अर्थ ना पता हो वो इस स्मारक को देख कर समझ सकते हैं। अगर समझना चाहते हों तो)


Avinash Bhardwaj Sharma

लेखक : अविनाश भारद्वाज शर्मा