हमें जीना है और तुक्के मारने हैं : डार्विन और विकासवाद – 2

Darwin and His Theory of Evolution and conflicts 2

आप अपने भाई-बहन से पैदा नहीं होते ; आप और आपके भाई-बहन किन्हीं और से पैदा होते हैं। वे कोई और आपके माँ-बाप हैं, जिनसे आपको अपनी देह प्राप्त हुई है। इसलिए यह मत कहिए कि आदमी बन्दर से निकला है। यह कहिए कि आदमी और बन्दर एक ही जीव से निकले हैं। वह जीव कोई ‘और’ है।

तो फिर ऐसा कोई मनुष्य दिखाइए जो पूरी तरह विकसित न हो। मेरा मतलब हो कि जो मनुष्य हो रहा हो , लेकिन हुआ न हो। मुझे रास्ते का रही दिखाइए , तब मैं रास्ते को मानूँगा। आपने कह दिया कि जीटी रोड पेशावर से कोलकाता जाती है , मैं क्यों मान लूँ। मुझे तो एक ट्रक देखना है जो पेशावर से चला हो लेकिन कोलकाता न पहुँचा हो। रास्ते में हो। और वह रास्ता आपकी बतायी जीटी रोड हो। तब विश्वास करूँगा।

यह प्रश्न प्रश्नकर्ता के बारे में जीव-विज्ञान की समझ की दयनीयता बताता है। अब इसका उत्तर इस तरह सुनिए। मान लीजिए किसी श्वेत अमेरिकी के पुरखे उत्तर यूरोपीय थे। उत्तरी यूरोप से कई साल पहले लोग चले और सम्पूर्ण यूरोप में फैल गये। उनमें से किसी का वंशज यह अमेरिकी भी है। अब कोई यह पूछे कि वह उत्तर यूरोपीय कहाँ है जिससे तुम निकले हो , हमें दिखाओ।
वह पुरखा तो कब का मर चुका। वर्तमान व्यक्ति उससे उद्भूत है। उसके कई अन्य कज़िन हैं , जो यूरोप में अलग-अलग जगहों बाशिन्दे हैं। लेकिन अब आप उस पुराने व्यक्ति को कहाँ से पाएँगे जो विगत है।

फिर बात मनुष्य के उन विगत पुरखों के जीवाश्मों की होती है। ऐसा कोई सबूत पेश कीजिए जो आदमी-जैसे न हों बल्कि उनके पुरखों-से जान पड़ें।

दरअसल समस्या ‘मनुष्य’ शब्द से जुड़ी सोच के साथ है। मनुष्य का अर्थ हममें से बहुत से आज का मानव लगाते हैं। हम नहीं सोच पाते कि कभी इस धरती पर निएंडरथल भी चलते थे। हम जावा-पीकिंग मानवों के अवशेषों से उनके जीवन को समझने की कोशिश तो करते हैं लेकिन उन्हें किसी आदिवासी के समतुल्य मान कर इति कर लेते हैं। मानव-विकास की कड़ियाँ इतनी आदिम हैं कि कोई आदिवासी कालक्रम में इन प्राक्-मानवों के आसपास भी नहीं फटकता।

गोरिल्ला मनुष्य नहीं बनेगा , वह आपका भाई है। न चिम्पैंज़ी बनेगा , वह भी आपकी तरह एक शाखा का जानवर है। न मैकाक बन्दर बनेगा , वह भी एक अन्य जीव है जो आपकी तरह निकला है। ये सभी टहनियाँ जिस बड़े तने की हैं , वह लाखों-लाख साल पहले बँटनी शुरू हो गयी थी। वह गोरिल्ला-चिम्पैंज़ी-मानव-मैकाक सभी प्राइमेटों का साझा पुरखा था।

फिर आपके पास अन्य जीवों के विकास की कड़ियाँ हैं। आपके पास आर्कियोप्टैरिक्स है जो पक्षि-पूर्वज है और आधुनिक पक्षियों-सा नहीं है। आपके पास डक-बिल्ड-प्लेटिपस-जैसा आधुनिक जीव है , जो आधुनिक है और जिसमें पक्षी , सरीसृप व स्तनपायी, तीनों के लक्षण हैं। आपके पास क्रमशः विकसित होता अंग-ज्ञान है , जो एक विकास-क्रम दर्शाता है। आपके पास आनुवंशिकी है जो विभिन्न जीवों में जीनों में एक विकास-शृंखला स्थापित करती है। आपका विकास-क्रम स्वतन्त्र नहीं है , आप कोई विशिष्ट नहीं हैं। आप किसी बड़े क्रम का हिस्सा हैं , जिसके अन्य जीव भी हिस्से हैं।

अतीत जब बहुत पुराना होता है तो खोयी कड़ियाँ ढूँढ़नी मुश्किल होती हैं। अगर कोई कड़ी मिल भी जाए , तो हम उसके पूरे-पूरे सत्यापन के लिए उसका कड़े-से-कड़ा इम्तेहान लेते हैं। तुम विकासवाद बताने आये हो : यह बताओ , वह बताओ। यहाँ कमी है , वहाँ कमी है। यह अधूरा है , वह अधूरा है। लेकिन ये ही लोग अपने-अपने धर्मग्रन्थों के आगे नतमस्तक-करबद्ध होकर दयानिधे ! महाप्रभो ! का भक्तिनाद करते नज़र आते हैं। वहाँ कोई प्रश्न नहीं , वहाँ कोई सन्देह नहीं। इनका तर्क केवल उसपर चलता है , जो उनको झकझोरता है। जो पुराना है वह चाहे असत्य हो , उसके लिए उनके मुँह में केवल आस्था की ‘अहा’ है।


Dr Skand Shukla

स्‍कन्‍द शुक्‍ल

लेखक पेशे से Rheumatologist and Clinical Immunologist हैं।
वर्तमान में लखनऊ में रहते हैं और अब तक दो उपन्‍यास लिख चुके हैं