बरखा दत्त की किताब

barkha dutt book

बरखा दत्त की किताब Book Written by barkha dutt

बरखा दत्त की किताब आई है। जिसमे उसने खुलासा किया है कि बचपन में उसके साथ यौन शोषण की घटना हुई थी। किताब में ही एक सर्वे के हवाले से बताया गया है कि देश के 53 प्रतिशत बच्चे यौन शोषण का शिकार होते हैं।

मैं यह नहीं कहता कि बरखा दत्त गलत कह रही है लेकिन उसने ना तो अपने रिश्तेदार का नाम बताया और ना ही उसके खिलाफ किसी प्रकार की कारवाई की बात की है। वे किसे बचाने का प्रयास कर रही हैं। खुद के बलात्कारी को?

देखने की बात यह है की यह किताब वास्तव में समाज को क्या संदेश देना चाहती है। यहां मैं बाजार तंत्र को खड़ा हुआ देखता हूं। यह वही बाजार है जिसने संयुक्त परिवारों के उत्पादों दरकिनार कर ऐसे उत्पाद पेश किए जो केवल nuclear फैमिली के लिए ही उपयोगी साबित हो सकते हैं।

परिवारों का जितना अधिक बिखराव होगा बाजार उतनी ही अधिक गति से छोटे पैकिंग वाले महंगे उत्पाद बनाकर बेच सकेगा। बाजार की बहुत अधिक कोशिशों के बावजूद भी भारत में अब भी संयुक्त परिवार बने हुए हैं।

हालांकि अब एक ही दादा का परिवार या परदादा का परिवार एक छत के नीचे नहीं रहता लेकिन एक पिता की सभी संताने अब भी बड़ा घर बना कर एक जगह रहने का प्रयास करती है ऐसे में परिवार के बीच संबंधों में शंका कैसे पैदा की जाए इसके लिए यह पुस्तक निश्चय ही उपयोगी साबित हो सकती है।

हमारे देश में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं। लेकिन उनका सामान्यीकरण करना कहाँ तक उचित है। 53 प्रतिशत बच्चे यौन शोषण का शिकार होते हैं। यानी हर दूसरा आदमी शक के दायरे में है।

मुझे अपने आस पास ये स्थिति दिखाई नहीं देती। क्या किसी परिवार में इतने बलात्कारी मिल जाएंगे।

मेट्रो शहरों में जहां एकल परिवार हैं वहाँ कमोबेश अधिक भय होना चाहिए। संयुक्त परिवारों में ऐसी स्थितियां अपेक्षाकृत कम होनी चाहिए।

क्या ये अभिभावकों के भय के दोहन का अस्त्र है। इस मुद्दे को दरकिनार करने के बजाय खुलकर विचार करना चाहिए। वरना हम एक और गलत धारणा और सामान्यीकरण के शिकार हो जाएंगे।