आधुनिक गुरुकुल का अभिनव प्रयास

vedic tree aligarh abhinav goswami

उत्‍तरप्रदेश के अलीगढ़़ जिले की खैर पंचायत में जाजरा गांव में एक बड़़ी घटना चुपचाप घट रही है। वहां आधुनिक गुरुकुल की नींव पड़़ चुकी है और उसे इस अंदाज में सफल गुरुकुल बनाने का अभिनव प्रयास एक डाटा साइंटिस्‍ट कर रहा है।

अपनी जवानी के शुरूआती दिनों से, या कहें समझ की समझ जब से आई है, तब से एक सपना ले रहा हूं, जागती आंखों से… कुछ दिन पहले मैंने उस सपने को जीते हुए देखा एक ऐसे इंसान को, जो वास्‍तव में इस सपने को जीने के काबिल है। फेसबुक पर एक मित्र हैं अभिनव गोस्‍वामी, हमारे आपस में कई सारे म्‍युचुअल फ्रेंड होंगे, लेकिन मैं उन्‍हें ठीक प्रकार से जानता नहीं था, कभी कोई उनकी पोस्‍ट पसंद आ गई तो लाइक कर दी, कभी उनका लाइक मिल गया, कभी गौर ही नहीं किया, जब तक कि एक दिन उनका फोन नहीं आ गया।

बहुत मीठी आवाज में बोल रहे गुसांईजी को मैं पहचान ही नहीं पाया, दो मिनट लगे, हाथों हाथ चलती कॉल के बीच प्रोफाइल खोलकर देखी तो पकड़ में आए कि अरे ये तो वही गुसांईजी है, जो फेसबुक पर राम भजन गाते रहते हैं दाढ़ी बढ़ाए। एक बार तो उनका लाइव वीडियो अमरीका से भी देखा था। मेरा इंप्रेशन यही था कि बंदा भजन गाता गाता अमरीका तक पहुंच गया, ठीक दुकान जमा ली है।

खैर, फोन पर बात हुई तो पता चला कि अभिनव गोस्‍वामी राम भजन गाते हैं, तो केवल अपने मन की तरंग के लिए, वास्‍तव में कुछ समय पहले तक गुसांई जी अमरीका के कैलिफोर्निया प्रांत में एप्‍पल कंपनी में डाटा साइंटिस्‍ट थे और अब नौकरी छोड़ अलीगढ़ के पास खैरपुर कस्‍बे से लगे जाजरा गांव में अपनी पुश्‍तैनी जमीन पर लौट आए हैं। खुद की चालीस बीघा जमीन और अपने परिवार की साठ बीघा जमीन मिलाकर एक गुरुकुल स्‍थापित कर रहे हैं।
गुरुकुल का नाम है वैदिक ट्री…
दो करोड़ रुपए सालाना की नौकरी को लात मारना आसान नहीं है, जबकि दिमाग में कोई बिजनेस प्‍लान न होकर, भारत की वैदिक परंपराओं और सनातनी जीवन पद्धति को फिर से जीवित करने का प्रण मात्र हो। यानी सबकुछ दांव पर लगाकर ऐसे तंत्र को सफल बनाने का प्रयास, जिसके विफल होने की गगनभेदी घोषणाएं हर बुद्धिजीवी से लेकर ऐरा गेरा नत्‍थू खैरा तक कर रहा है।

गुसांईजी चाहते थे कि उनकी समान विचारधारा वाले लोग भी उनके द्वारा स्‍थापित किए जा रहे तंत्र को समझे जाने और अपेक्षित योगदान दें, इसके लिए उन्‍होंने दो दिन का कार्यक्रम रखा, वहीं खेत पर। मैंने सोचा जाएंगे कार्यक्रम में, हां, ना चल रही थी कि एक दिन उन्‍होंने अपने खेत पर उगे आम के पेड़ से टपके आमों का फोटो डाल दिया, बस उसी दिन मैंने टिकट बुक करवा लिया।

मौके पर पहुंचने से पहले मेरे दिमाग में कौतुहल और मन में आम थे, लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि वास्‍तव में क्‍या हो रहा है।

अभिनव कोई नई बात नहीं कर रहे हैं, जो बातें हम सालों से फेसबुक पर पेल पेलकर घने काले बालों वाले सुदर्शन युवक से आधे सफेद बालों वाले अधेड़ हो गए हैं, ठीक वही बातें हैं, अंतर बस इतना है कि उन्‍होंने उन बातों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। अगर आपकी पीठ में सिरहन नहीं दौड़ पाई है, यह बात सुनकर तो आपको गुसांईजी के खेत पर पहुंचना चाहिए, क्‍योंकि मुझे भी कंपन वहीं महसूस हुए।

शुद्ध गाएं…

देश की अधिकांश गायों को भ्रष्‍ट किया जा चुका है, आज अगर आपको शुद्ध ब्रीड की राठी, थारपारकर, साहीवाल अथवा गिर गाय चाहिए तो आपको इतने पापड़ बेलने पड़ेंगे कि आप बीकानेरी पापड़ का ऑनलाइन स्‍टोर खोल सकते हैं। वास्‍तव में गाएं खूब हैं, लेकिन वे शुद्ध नस्‍ल की नहीं हैं। कुल जमा 200 गायों का अपना फार्म हाउस बनाने का प्रयास कर रहे अभिनव को पिछले एक साल के अथक प्रयासों से मात्र 25 गाएं और 15 बछिया मिली हैं और एक सांड। कुल जमा 41 गौवंश में इक्‍का दुक्‍का मिक्‍स ब्रीड भी आ गई है, जिसे लेकर गुसांईजी निराश हैं। अब वे अधिक सावधानी से शुद्ध नस्‍ल की खोज कर रहे हैं।

गोबर गैस से बिजली…

यूपी के काफी मित्र मेरी लिस्‍ट में हैं, अधिकांश पहले मायावती को बाद में अखिलेश को और अब योगी को बिजली के लिए कोसते नजर आते हैं, पहले ज्ञानदत्‍त पाण्‍डेजी ने इसका हल निकाला सोलर पैनल के रूप में, लेकिन यहां अभिवन एक स्‍तर और आगे जा चुके हैं, उन्‍होंने सोलर पैनल भी लगाए हैं, बिजली का कनेक्‍शन भी लिया और गौवंश से मिल रहे गोबर और मूत्र से भारी मात्रा में गोबर गैस भी बना रहे हैं, इससे बिजली पैदा हो रही है। यानी उनके पास चौबीस घंटे लगातार श्रेष्‍ठ श्रेणी की बिजली है। आप खेत पर होकर भी शहरी माहौल का आनन्‍द ले सकते हैं।

ऑर्गेनिक फार्मिंग…

गौवंश से मिले गोबर में से बिजली निकाल लेने के बाद उसमें करंट बढ़ जाता है, नेताजी भले ही पानी में से करंट निकालने से परेशान हों, लेकिन गोबर गैस प्‍लांट से निकला मलबा अधिक ताकतवर खाद का काम करता है। सौ बीघा में गौवंश का गोबर और मूत्र दोनों ही प्राण हैं। उससे ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू कर दी गई है। पहली खेप में वृहद् स्‍तर पर केले के पेड़ उगाए गए हैं। खेत पर एक ओर जहां वर्मी कंपोस्‍ट खाद तैयार हो रही है तो दूसरी तरफ सब्जियों की क्‍यारियां तैयार हैं, जहां बिना एक भी बूंद जहर छिड़के हुए भारी मात्रा में सब्जियां तैयार होंगी।

गुरुकुल…

अभिनव के मूल सपने में न तो गौशाला है और न ही खेती, उनका सपना गुरुकुल स्‍थापित करने का है। इसके लिए शिक्षकों की तलाश का दौर चल रहा है। ऐसे समर्पित शिक्षक जो केवल गाल न बजाएं वरन आधारभूत संरचना तैयार करने में उनकी मदद करें। जो बच्‍चे गुरूकुल में शामिल होने आएं उन्‍हें इस प्रकार आत्‍मनिर्भर बनाया जाए कि गुरुकुल से निकलने के बाद वे अपने आप में संस्‍था का रूप धारण कर सकें।

इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर

अभी गायों के लिए और रहने के लिए पर्याप्‍त स्‍थान है, लेकिन गुरुकुल को बहुत शानदार तरीके से बनाया जा रहा है। विद्वानों और गुरुजनों के लिए संभवत: झोंपडि़यां बनाई जाएंगी, जो पर्याप्‍त सुविधाएं लिए हुए होंगी और बच्‍चों के लिए हाईटैक मल्‍टीस्‍टोरी इमारत बन रही है।

अब सवाल यह है कि मैं यह क्‍यों लिख रहा हूं और यह मेरा सपना कैसे हो सकता है। वास्‍तव में मेरा सपना गुरुकुल का तो नहीं, लेकिन ऐसे खेत, ऐसा शुद्ध वातावरण, ऑर्गेनिक खेती और गौवंश का रहा है। अगर मैं वह सबकुछ हासिल भी कर लेता तो उससे आगे क्‍या, इसका जवाब अभिनव के पास था, उससे आगे वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू होती है, जो अभिनव कर चुके हैं। उनके इस प्रयास को साधूवाद…

अब समस्‍या यह है कि संस्‍कृति भ्रष्‍ट हो रही है, समस्‍या यह है कि शिक्षा व्‍यवस्‍था पंगु है, समस्‍या यह है कि परंपराएं खत्‍म हो रही है, समस्‍या यह है कि सरकार के पास बिजली नहीं है, समस्‍या यह है कि शुद्ध खाने को नहीं है, समस्‍या यह है कि गौवंश नष्‍ट हो रहा है…

इन सभी का समाधान करने में है, यह अभिनव करके दिखा रहे हैं। मैं अभिनव को हर संभव सहयोग करने का आश्‍वासन देकर आया हूं और जितनी मेरी क्षमता है, उतना सहयोग करूंगा भी। हो सकता है, उन्‍हें मेरी कुछ खास मदद की जरूरत ही न पड़े, फिर भी शुभकामनाओं के रूप में मेरी चेतना का सकारात्‍मक अंश उन तक जरूर पहुंचे। तो कहानी की सीख इतनी सी है कि समस्‍याएं हैं, समाधान करने में है। अभिवन जैसा इंसान देश के हर जिले में एक चाहिए, भारत स्‍वयं बदल जाएगा। मोदीजी के बदलने से नहीं बदलेगा, अभिवन और इन जैसे लोगों से बदलेगा।